सोमवार, मई 09, 2011

आपको ये सरप्राइज़ कैसा लगा?

"मम्मा, आप अभी कुछ देर मेरे कमरे में मत आना." बिटिया ने कल सुबह बड़े प्यार से कहा. मैंने पूछा," क्यों, कोई खास बात?" बिटिया वहीं से बोली,"हाँ खास बात तो है ही ना. आज 'मदर्स डे' है और मैं अपनी मम्मा के लिए अपने हाथों से एक कार्ड बनाना चाहती हूँ, जो आप अभी नहीं देख सकते हो." "ठीक है जी.", कहते हुए मैं अपने दूसरे कामों में व्यस्त हो गयी. सोचती रही कि बेटियाँ कितनी प्यारी होती हैं. जिया के साथ बीते पिछले नौ सालों का एक-एक लम्हा याद करके मैं मन ही मन मुस्कुराती रही.

घंटे भर में ही एक खूबसूरत कार्ड तैयार था. जिया ने मुझे आँखें बंद करने को कहा और कार्ड को कुछ इस तरह से मेरे हाथों में रखा कि मेरी आँखें खुलते ही वो मुझे दिख जाये. मतलब ये कि जिया मेरी खुशी को हर संभव बढ़ाना ही चाह रही थी. कार्ड तो खूबसूरत होना ही था इतने प्यार से जो बना था. मैंने अपनी खुशी का इज़हार करते हुए जिया से कहा," अरे वाह, ये तो बहुत ही सुन्दर कार्ड बनाया है आपने." जिया रानी थोड़ी सी मायूस होते हुए बोली,"ये पूरा कार्ड मैंने नहीं बनाया है. मेरी ड्राइंग इतनी अच्छी कहाँ है? मैंने तो मेरी एक पुरानी किताब में से ये चित्र काटा, फिर उसमे रंग भरा और उसे एक सफ़ेद कागज़ का कार्ड बनाकर उस पर चिपका दिया." मैंने मुस्कुराते हुए उस से कहा," आपके पास तो बड़े अच्छे और नए आईडिया हैं." अब जिया ने खुश होते हुए कहा,"आप तो बस इतना बताओ मम्मा कि आपको ये सरप्राइज़ कैसा लगा?" मैंने उसे गले लगते हुए कहा," बहुत अच्छा, लेकिन आपसे थोड़ा कम अच्छा."


जिया ने कार्ड के अन्दर लिखा था," मेरी माँ मेरे लिए भगवान है." मैंने पूछा कि क्या सोचकर आपने ऐसा लिखा? जिया बोली, "कुछ अच्छा सा लिखना चाह रही थी और इससे अच्छा कुछ सूझा ही नहीं, इसलिए यही लिख दिया."

कुल मिलाकर यही कि 'मदर्स डे' पर मेरी प्यारी बिटिया ने मुझे खुश करने के लिए ढेर सारे जतन किये और मेरा दिन खूबसूरत बना दिया.

बेटी का अपने माता-पिता से कितना नाज़ुक और संवेदनशील रिश्ता होता है. बेटियाँ बचपन से ही जानती हैं माता-पिता को खुश रखना. इसके लिए जब तक वो अपने माता-पिता के घर में रहती है, उन्हें खुश रखने के लिए हमेशा जतन करती रहती हैं. माता-पिता का घर छोड़कर अपना घर बसा लेने के बाद भी बेटी हमेशा उस घर से दिल का रिश्ता रखती है. बिटिया के जन्म से पहले ही जैसी तस्वीर मैंने अपनी बेटी के लिए अपने दिल में संजोयी थी, मुझे हूबहू वैसी ही बेटी मिली. चुलबुली....नटखट.... फिर भी समझदार और बेहद संजीदा......

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति!
    आपको तो नियमित रूप से लिखना चाहिए.

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  2. धन्यवाद सर, आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए बहुत मायने रखती है

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  3. बेटियाँ भगवान का सुन्दर उपहार है.. जिया सचमुच समझदार बच्ची है. जिया को मेरा प्यार..

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  4. बहुत शुक्रिया, मनोज जी
    बेटियाँ भगवान का सुन्दर उपहार है...सच में

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  5. baishek baiti iswar ka sabse khubsoort vardaan hai,or mai aj har maa se sirf yahi prathana karti hoon ki vah apni in masoom se kaliyon ki usi tarah raksha kare jaise ek seep mai ek moti rehta hai,aj ke is adharmi yug mai yeh nitant awashak hai ki aap apni baiti ko apne laad payar ke alava is samaj ka dusere roop se bhi paricht karaye,apni baiti ke sundae or surakshit bhavishey ke liye yeh behad jaroori hai ki aap kadam kadam per uska uchit margdarshan kare.

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  6. शुक्रिया वैष्णवी
    आपकी सलाह बड़ी नेक है

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  7. are...ye to meri bhi baat hai. bilkul yahi anubhaw mere pas hai bas meri beti ne mujhe bhagwan nahi likha...

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  8. अरे वाह!प्रतिभा जी,क्या खूब कहा आपने...!

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