बुधवार, अप्रैल 18, 2012

काश कि जिए जाना ही ज़िंदगी हो जाये

सुबह 6.40 पर एक मित्र का पहला कॉल मिस कर दिया तो एक अफ़सोस के साथ आँख खुली. बेटी के स्कूल का भी पहला दिन आज ही था. उसे जगाना कोई आसान काम नहीं है, पर ज़रूरी था. वो भी थोड़ी नाराज़गी के साथ ही उठी. बेटी के पापा भी अलसाये से उठे और सब व्यस्त हो गये अपने-अपने कामों में....

जन्मदिन पर कोई अपना नींद से उठते ही शुभकामनाएं दे तो कितना अच्छा लगता है...बेटी के पापा तो रात बारह बजे ही शुभकामनाएं दे चुके थे इसलिए शायद अब आराम से ही बात होगी... इसलिए मैं भी बेटी के लिए टिफ़िन बनाने जाने लगी कि माँ उठ गयी. सुबह की पहली शुभकामना और आशीर्वाद उन्ही से  मिला. मैं खुश हो गयी और तभी बेटी और बेटी के पापा खूबसूरत कार्ड और गिफ्ट के साथ मुझे शुभकामनायें देने लगे...दिन अपनी रौ में खूबसूरती से बहने लगा...


अनगिनत बधाईयाँ और शुभकामनाएं मिल रहीं हैं तब से अब तक ...मैं ऐसे दोस्तों के बीच खुद को धन्य महसूस करती हूँ जो हर हाल में मेरे साथ हैं...और जिनकी दुआएं मुझ पर असर करती हैं...


मेरी एक मित्र ने शुभकामनाओं स्वरुप मुझे लिखकर दिया..."आप वो हैं, जिनसे मैंने सिखा है कि 'खुद' हो जाना क्या है....और अब बस मेरी भी यही इच्छा है कि मैं 'मैं' बन सकूँ...!" ये मेरे लिए खुशी की बात हैं कि मेरी मित्र ने मुझे इतनी अच्छी तरह से जाना.

मेरी एक और सबसे प्यारी मित्र ने मुझे सिर्फ़ इसलिए देर से फोन किया कि मेरी नींद में खलल ना पड़े , उसे ये तो पता है कि मुझे देर तक सोना पसंद है पर ये भूल जाती है कि अब मुझे बेटी को स्कूल भेजने के किये जल्दी उठना ही पड़ता है...शुक्रिया दोस्त, हमेशा मेरे साथ बने रहने के लिए.

लगभग तीस साल पुरानी एक और मित्र की आवाज़ आज कोई छः महीने बाद सुनी होगी पर ऐसा लगा जैसे रोज़ बात होती है...बहुत ही अपनेपन और नज़दीकी का एहसास होता है कुछ खास दोस्तों के साथ...वो है ही ऐसी जिंदादिल...


बीस साल पुरानी बात है जब जोधपुर यूनिवर्सिटी में  एम.एस.सी. करते ही पर पीरियड बेसिस पर कक्षाएं लिया करती थी मैं.... के.एन. कॉलेज की एक विद्यार्थी मेरे पढ़ाने के तरीके से बेहद प्रभावित हुई. बाद में वो भी एम.एस.सी. और पी.एच.डी. करके लेक्चरर बनी और एक लेक्चरर पति के साथ घर बसाया. अभी कोई एक महीना पहले एक गंभीर बीमारी के चलते उसके पति का देहांत हो गया...आज भी, उस बच्ची ने मुझसे बात करके मुझे शुभकामनाये दीं...मेरी ढेरों दुआएं और आशीर्वाद उसके लिए और उसके भविष्य के लिए...कि वो दुःख और असमंजस की इस घड़ी में स्थिरता से अपने लिए सही निर्णय ले सके...ईश्वर हमेशा उसका साथ दे.

मेरे  परिवार के सब लोगों ने मेरे दिन को खास बनाया और अब शाम को कुछ मित्रों ने घर धमकने का वादा किया है...उन्हीं का इंतज़ार है...दिन बेहद अच्छा बीता है, इंशाल्लाह शाम भी अच्छी ही गुज़रेगी.


आभासी दुनिया के सच्चे मित्रों का भी दिल से शुक्रिया मेरे जन्मदिन पर मुझ पर अनगिनत दुआएं लुटाने के लिए...ऐसी हसीन ज़िंदगी पाकर मुझे अक्सर लगता है कि मेरे जीते जी "वंडर पिल" जैसी कोई दवा इजाद हो जाये जिसे लेते ही अगले मनचाहे सालों तक जिया जा सके...जीने के साथ-साथ चलने वाला मौत का डर खतम हो जाये...!!



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